Tag Archives: reality

I Sit

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Doing-nothing-on-purpose

I sit half thinking, half relaxed

here’s the time when am not taxed

leaving work and designation

that bore slavery and recognition

Am no more bound to work anymore

nor do i search for, at any door

I sit casually with my tea

loving and loathing the time that’s free

Unable to think of what to do

To do, to do, to act no clue.

I should practice quietness

for doing snatches happiness

I should just sit happy for a while

Travel inside and work in style

for bread and butter has its own source

I need not get up for any force

In steps i try to travel inside

but thrown away by high tide

still being trapped with work outside

i sit here and sit on the other side

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Mehfil e Zindagi

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यह ज़िन्दगी की महफ़िल ….

 

अब कहाँ ….

शाम ए महफिले सजा करती है

हर तरफ बदरंग सी कोई नुमाइश लगती है

ना कहीं सुर है ना कोई साज़

हर तरफ सिने में छुपा रहा कोई राज़

 

क्यूंकि …

 

दिखावा करती यह दुनिया बरसो से चली

दिखावे के बिना अब कहाँ कोई शाम ढली

दिखावो में सिमटा हुआ हमसफ़र

दिखावटी ज़िन्दगी का छोटा सफ़र

 

इस …

 

चकाचौन्द में डूबा हुआ मन

हुआ बोझिल सा हर अन्तरंग

किसे देखे किसे बताये

की इस मन की क्या है आशाए

 

क्यूंकि

 

ना अब फुर्सत ना कोई विरासत

क्यूँ दे कोई अब अपना वक्त

किसको परवाह, कौन हो तुम

ढूँढेगा कौन हो गए अगर गुम

 

तो

 

यह महफिले ए ज़िन्दगी है जनाब

समझाना छोड़ दीजिये इसको ख्वाब

हकीकत है यही बयान कर चुके हम

इस दुनिया में नहीं हर कोई सनम

 

इसलिए

 

रिश्ते नाते वफ़ा या मोहब्बत

ना बनो इनमे किसी के भी भक्त

लगाओ मन प्रभु के चरणों में

नहीं रहा कुछ बाकी अब  झूठी कसमो में