Tag Archives: hindu

Mata Ke Nau Roop

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Day 8 Maa Durga

ThoughtSummary

 
देवी दुर्गा के नौ रूपों में महागौरी आठवीं शक्ति स्वरूपा हैं. दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है.दुर्गा सप्तशती में शुभ निशुम्भ से पराजित होकर गंगा के तट पर जिस देवी की प्रार्थना देवतागण कर रहे थे वह महागौरी हैं. देवी गौरी के अंश से ही कौशिकी का जन्म हुआ जिसने शुम्भ निशुम्भ के प्रकोप से देवताओं को मुक्त कराया . यह देवी गौरी शिव की पत्नी हैं यही शिवा और शाम्भवी के नाम से भी पूजित होती हैं.

देवी पार्वती रूप में इन्होंने भगवान शिव को पति-रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी, एक बार भगवान भोलेनाथ ने पार्वती जी को देखकर कुछ कह देते हैं. जिससे देवी के मन का आहत होता है और पार्वती जी तपस्या में लीन हो जाती हैं. 

इस प्रकार वषों तक कठोर तपस्या करने पर जब पार्वती नहीं आती तो पार्वती को खोजते हुए भगवान…

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Mata Ke Nau Roop

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Day 7 Maa Kalratri

ThoughtSummary

 

मां कालरात्रि ::

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

आज नवरात्र का सातवां दिन है और सातवें दिन पूजा होती है मां कालरात्रि की। कालरात्रि मां  ,जो भी उनकी पूजा करता है उसको हमेशा फल प्राप्त होता है, तेज बढ़ता है, दुश्मनों का नाश होता है, पापों से मुक्ति मिलती है और साथ ही दूर भागने लगते हैं भय।
लौकिक स्वरुप में माता के शरीर का रंग अमावस्या रात की तरह एकदम काला है मां कालरात्रि के सिर के बाल बिखरे हुए हैं। कालरात्रि देवी के तीन नेत्र और चार भुजाएं हैं। ब्रह्मांड के समान गोल नेत्रों से चमकीली किरणें फूटती रहती हैं। मां कालरात्रि जब सांस लेती हैं या सांस छोड़ती हैं, तो उनकी नासिका से आग की भयानक लपटें निकलती रहती हैं। लेकिन जो भी उनकी पूजा करता है वो जिंदगी में कभी भी विफल नहीं होता।मां का सातवां रूप बड़ी ही…

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Mata Ke Nau Roop

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Day 6 Maa Katyani

ThoughtSummary

माँ कात्यानी::

आज का परम पवन दिन श्री माँ कात्यानी की उपासना के नाम से जाना जाता है पूर्व काल में माँ कत नमक ऋषि के पुत्र कात्यायन की अपार भक्ति से प्रसन्न हो कर प्रगट हुई इसी कारन श्री माँ को कत्यानी के नाम से जाना गया, महिषासुर मर्दिनी माँ कात्यानी सदेव ही दीन हीन व् सत्य निष्ठ प्राणियों की रक्षा करती है श्री माँ परम फल दायनी व् मोक्ष सुख कारिणी है.
आज के दिन भक्त श्री माँ की उपासना कर मन की परिपूर्ण गति को प्राप्त करते है जो जीव के कल्याण की परिपूर्ण सीमा है. श्री माँ कात्यानी के श्री चरणों में पुनः पुनः नमन

या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यानी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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Mata Ke Nau Roop

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Day 5. Maa Skandmata

ThoughtSummary

पांचवा स्वरूप स्कन्दमाता::शेर पर सवार होकर माता दुर्गा अपने पांचवें स्वरुप स्कन्दमाता के रुप में भक्तजनों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहती हैं. कल्याणकारी शक्ति की अधिष्ठात्री देवी स्कन्दमाता की नवरात्र में पूजा अर्चना करने का विशेष विधान है. देवी भगवती का यह स्वरूप देवताओं की सेना के मुखिया स्कन्द कुमार (कार्तिकेय) की माता का स्वरूप है, इसलिए उन्हें स्कन्दमाता कहा जाता है.स्कन्दमाता शेर की सवारी पर विराजमान हैं और उनकी चार भुजाएं हैं.

इन चतुर्भुजी और त्रिनेत्री माता ने अपने दो हाथों में कमलदल लिए हैं और एक हाथ से अपनी गोद में
ब्रह्मस्वरूप स्कन्द कुमार को थामा हुआ है. चौथा हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में है.

इनका वर्ण पूर्णतः श्वेत है और ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, जिस कारण माता को पद्मासना देवी भी कहा जाता है.

शास्त्रों के अनुसारा माता स्कन्दमाता की पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है और उसे…

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Mata Ke Nau Roop

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Day 4. Maa Kushmanda

ThoughtSummary

Sorry friends for posting late today, as we had A special Kirtan at home on the occasion of Navratri where the ladies from our  neighborhood sang mata rani’s bhajans, lankuriyas, and arti geets. it was a fantastic, aesthetic, divine spiritual experience and fun filled with dance and masti. will post some pics of that shortly …

Jai Mata Di

 

वैसे तो मां दुर्गा का हर रूप बहुत सरस होता है। लेकिन मां का कूष्माण्डा रूप बहुत मोहक और मधुर है। नवरात्र के चौथे दिन मां के इस रूप की पूजा होती है। कहते हैं नवरात्र के चौथे दिन साधक का मन ‘अदाहत’ चक्र में अवस्थित होता है। अतः इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और अचंचल मन से कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा करनी चाहिए।

“कुत्सित: कूष्मा कूष्मा-त्रिविधतापयुत: संसार:, स अण्डे मांसपेश्यामुदररूपायां यस्या: सा कूष्मांडा”

माँ कुष्मांडा जिनका मुखमंड सैकड़ों सूर्य की प्रभा से प्रदिप्त है उस समय प्रकट हुई उनके…

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Mata Ke Nau Roop

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Day 3 Maa Chandrghanta

ThoughtSummary

आज आदि-शक्ति दुर्गा के तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा होती है.माँ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है.इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है इसलिए इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है. इनके शरीर का रंग सोने के समान चमकीला है. इनके दस हाथ हैं. इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं. इनका वाहन सिंह है. इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है.

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।। 

देवी चन्द्रघण्टा भक्त को सभी प्रकार की बाधाओं एवं संकटों से उबारने वाली हैं. इस दिन का दुर्गा पूजा में विशेष महत्व बताया गया है तथा इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन किया जाता है. माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक एवं दिव्य सुगंधित वस्तुओं के दर्शन तथा अनुभव होते हैं, इस दिन साधक…

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Mata ke Nau Roop

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Day 2 Maa Brahmacharani

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नवरात्र के दूसरे दिन नवशक्ति के दुसरे स्वरुप मां ब्रह्मचारिणी का है:

ब्रह्म का अर्थ हैं तप। मां ब्रह्मचारिणी तप का आचरण करने वाली भगवती हैं इसी कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया। मां के इस रूप की आराधना से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार व संयम जैसे गुणों वृद्धि होती है।

मां ब्रह्मचारिणी श्वेत वस्त्र पहने उनके दाहिने हाथ में अष्टदल कि जप माला एवं बायें हाथ में कमंडल सुशोभित रहता हैं।शक्ति स्वरुपा देवी ने भगवान शिवको प्राप्त करने के लिए 1000 साल तक सिर्फ फल खाकर तपस्या रत रहीं और 3000 साल तक शिव कि तपस्या सिर्फ पेड़ों से गिरी पत्तियां खाकर कि, उनकी इसी कठिन तपस्या के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया।

इस देवी की कथा का सार यह है की जीवन के कठिन परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होना चाहिए माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से शर्व शिधि की प्राप्ति…

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Happy Navratri Mata Ke Nau Roop

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Happy Navratri to all my dear Friends . Lets Welcome Maa Durga in all her Nau Roop (nine avatars ) with all our heart and devotion to seek her blessings.

ThoughtSummary

May This Navratri be as bright as ever.
May this Navratri bring joy, health and wealth to you.

आप सभी को नवरात्री के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई. आज मां दुर्गा शक्ति की उपासना का प्रथम दिन है ,माँ दुर्गा पहले स्वरूप में ‘शैलपुत्री’ के नाम से जानी जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। आज के दिन शैलराज हिमालय की कन्या माँ शैलपुत्री जी का पूजन होता है, माँ शैलपुत्री दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल का पुष्प लिए अपने वाहन वृषभ पर विराजमान होतीं हैं. नवरात्र के इस प्रथम दिन की उपासना में साधक अपने मन को ‘मूलाधार’ चक्र में स्थित करते हैं, शैलपुत्री का पूजन करने से ‘मूलाधार चक्र’ जागृत होता है और यहीं से योग साधना आरंभ होती है जिससे अनेक प्रकार की शक्तियां प्राप्त होती हैं।
अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई…

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Going Rituals : Explore Spirituality with Cow’s Dung

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Recently i went to my mom’s place for the puja and ceremonies that were to be performed by me ,being the new born baby’s Aunt. These rituals are mostly done in the hindu families where the child is born and more rituals are followed where we have a baby boy born into the family unlike little things done when a girl is born but there are many liberal families where ceremonies are performed with happiness and joy even on the birth of a baby girl.

So we had a lot of ceremonies accompanied with kirtan nights for almost 7 days  that were full of songs and dance , along this there was loads of work for me specially i had to forgo my expectations of being specially treated or greeted on arriving home few months after my marriage . hahahaha. well i never expect that, and my mom straight away directed me for work i had to do and all the other things to be taken care of, specially by me.

So the rituals started with functions, first was putting satiyas (卐 Swastik symbol) is an auspacious hindu symbol to bring good fortune and luck with them, i made those on the dholak to begin with the kirtans ( song and dance) . Another thing i’d like to tell you is that i cannot do without the satiyas puja ,Trust me without satiyas, i cannot start anything new , even on buying a new gas oven i put satiyas with haldi mixed in water or be it for the new laptop i just make them . So the dholak pujan was done by putting haldi swastikas on both side of the dholaks and then playing it and singing few songs with old ladies with the Dholak Feet  😉 …

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It was followed by prashad and food arranged at the terrace by putting tents and chairs for the relatives and neighbors who’d come for the lunch but due to heavy rains the tents got wet and we had to arrange everything inside the room but it was all the more fun and everyone enjoyed the food and rain together. here are some snaps of the event.

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All this was good fun with  the overload of so much work i had to run up and down three floors taking care of guests , my sister in law her baby and my mother who just cannot do without mixing up all the work  and going crazy on such occasions due to management and a lot of mis management of work .

But for me “vue” was like a relief ,as we call him all my tiredness and lethargy went away taking him in my arms i walked in the   veranda all night and day singing to him and swinging him in my arms,we still  haven’t decided with the name for him and so we call him, vue, Illa, Inga, Inge, tushu . Illa And Inga because when he cries it sounds as if the wailing sound is ILLAAAAA  ILAAAA and now its INGAAAAA INGAAAEE.  Lolz so that’s how the names originated.

And now we had the keeping of satiyas this thing was completely new to me as well , i had imagined doing it on the wall with haldi , chandan or kumkum, but never imagined doing it with the Cow’s Dung (gobar) .

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As i got over with this, that ok, i have to dig my hands into that polythene bag in which the glorious cow dung was stored for me.  anyhow it seemed ok no worries i will do it i know how to make a swastika its easy ,but then it was not just the satiya ,what frightened me was the things i had to draw on the wall with bare hands and thick cow dung  more intricate designs that can not be wrongly done . to inspect me i had 3 to 4 old ladies and the bunch of middle aged women looking at me seriously. I had to make very specific designs and it was like a test to my artistry skills though am not that good in arts . as if this wasn’t enough to put me through grill and grind one more test was insert a thin long stick of grain that should not break or damage in the process into the satiyas. whewwww. Time to put the dung into action .

And not just that it was one design but there were two walls beside the door which had to had two different designs i completed one thought it was over but then here comes the women in blue my grandma saying ” ek aur banana hai chori abhi se ke thak ri hai ” ( O  Girl you’re tired already , you have to make one more ). Ok no problem ill do it and so i made one more and now this was a lot more easy i thought but actually both designs were as difficult as i never thought.

 

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Actually some may give out an eww or aikk at the sound of cow dung but i take it as the most divine and spiritual encounter to place my hands into that warm cold moist cow dung its something more than that it connects me with smells of village and more ethnic side of me , had i been in the village i could decorate the walls and floors with it as they actually do it still today. Cow dung is so holy and so divine that we use it for the most holy rituals ,forget marriage what more is divine and sacred than the birth of a new life in which we use it and its so important just like the holy mother cow or GAU MATA as we call her.

 

I would just love to share an instance that my uncle or mamaji (my mothers brother) told us when they used to live in the village before coming to city and settling here to make new wealth and riches that he has now. He said that in the village there were no lights or fans, coolers for the summer seasons and thus the ground got all heated up, and it was impossible to keep your feet cool even with water as the matka’s ( earthern pots ) couldn’t cool water as much as the refrigerators do nowadays , so what he did like the other friends, was that he would put his feet into the cow dung and stand there for hours feeling cool, relaxed and refreshed .

Imagining him doing this now it just cant be he’s a big man now literally, but id love to put my feet into the cow dung to feel that warmth and good am blessed i could do it with my hands still. Its such a spiritual experience only who will do it, can explore it.

Here’s some picture of those designs i made with cow dung , haldi, wheat stick, wheat flour .

The Nights were full of fun and dance with all the ladies from our neighborhood dancing and singing songs . Some snaps of those too

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So I miss my home now as am back home with my hubby , couldn’t be there for some more days just a week as i longed for my hubby too being there, he missed me every day and so i cut short my visit and came back to him . I am blessed to have such a wonderful family here and there . i wish there come’s a time when i could have both families just a mile away rather than being mile’s away.