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My Darling 498 a

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अकेला क्या दुखी कम था “मैं”
जो जुड़ी मुझसे एक और “मैं”Image
“मैं” कहाँ अब बन गया था “तू”
और इस “तू – मैं” में मिला ना कोई क्लू

जिसके ख्वाब देखे सपने सजाये
वो मेरे दर पर दरोगा साहब को ले आए
कभी जो कहती थी “डार्लिंग” प्यार से
अब बदला लिवा रही है वो मार-धाड़ से

दुखी, बेमन, बोझिल अंतरमन को संभाले
रिश्तों का उलझता ताना बना सुलझाते
थक चूका हूँ मैं अब इस बर्बादी से 
तौबा करता हूँ मैं इस शादी से

बनाकर लाया था जिसको मेरे घर की लक्ष्मी
अब डालेगी डकैती बनकर कुलक्ष्मी
कहाँ छुटकर जाऊं इस कोर्ट कचहरी से
लाइलाज बन चुकी हैं बीमारी अब 498 a 

कोई समझाए मेरी प्राणप्रिय धरमपत्नी को
क्यों मेरे प्राणों की प्यासी बन चुकी हैं वो 

सोचता हूँ क्यूँ कहा था कभी मैंने उसे ऐसा
की डार्लिंग क्यूँ खर्चती हो इतना सारा पैसा ?
मेरी आमंदनी  है अट्ठन्नी और तुम खर्चती हो रुपईय्या 
इतना कहने पर ही तुमने डूबा दी मेरे अरमानो की नईय्या
 

जो ना किया सितम उसपर तो मिली सज़ा फिर क्यूँ
“आप”,” तुम” कहते करते कब बन गया ” मैं” से “तू” 

मुझे फूलों की माला पहनाने वाली, मेरे जीवन का प्यार
बना गयी 498a ,dv, crpc 125 अब मेरे जीवन का सार

क्यूँ जानकार सब बनती हैं अनजान
मुझसे ज्यादा तुझे है सच्चे इंसान की पहचान 
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Quote

Life is easy to live, if everyday there’s no fight for Attachment

It would have been much easier if we hadn’t had to please everyone and do things that let the bond stay longer and forever, because of getting the feeling and dose of attachments each second and every day it becomes hard to keep in line with everyone . we cannot manage people nor their emotions and thus we wish to handle it all and get this daily dose of attachments if not from one then we search for others . 

But Life could have become great if we did not crave for being attached 

Life is easy to…