Author Archives: ShilpiRajput

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Am in a different race

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For kanha

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मैं ना जानु सावरे तू कौन
तेरी बंसी सुन भइ में मौन

तेरी वाणी तेरे गृंथ
ना मैं जानु तेरे पंथ

पड़ गया जो तेरा रंग
नगर घूमती बनु मंगन

मैं ना जानु राधा और मीरा
जानू मगर विरह की पिणा

जो श्याम ना मिले उस द्वार
क्या करू भवसागर पार

यह देह रूपी संसार
निरर्थक जिवन अपार

गिरधारी गंगाधर ओ श्याम सावरे
मेरी तृष्णा को अपनी मुरली से हरले

Krishna poem

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पुछे सखियाँ मेंरी
वह कौन तेरा है
मैं सकूचाउ बोलु
यह श्याम मेरा है

पुछे सखियाँ मेंरी
यह बंसी किसकी है
मैं नयन बंदकर बोलु
धुन इसकी कणॅ में बस्ती है

पुछे सखियाँ मेंरी
यह राधा किसकी है
मैं ईर्षालु होकर कहूं
यह प्रियसी उसकी है

पुछे सखियाँ मेंरी
यह मोर पंख किसका है
मैं लाजभरे मुख से बोलु
रुप यह चित मोह लेता है

पुछे सखियाँ मेंरी
यह श्याम श्याम क्यूँ है
अहंकार से बोलु मैं
वो सब दुख जो हर लेता है

Difference

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              What is that makes you
              different from me ?      

              Its just that am indifferent
              towards any differences.

Shilpi